झारखंड की पंचायतों को ₹14,231 करोड़ की मदद मिल सकती है, 16वें वित्त आयोग की अहम सिफारिश
रांची/नई दिल्ली: झारखंड के ग्रामीण और शहरी विकास को आने वाले वर्षों में नई गति मिलने की संभावना है। 16वें वित्त आयोग ने राज्य की पंचायतों और नगर निकायों के लिए कुल 14,231 करोड़ रुपये की अनुशंसा की है। इस प्रस्तावित वित्तीय सहायता को लेकर नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने आयोग का आभार व्यक्त करते हुए इसे राज्य के स्थानीय विकास के लिए महत्वपूर्ण पहल बताया।
मंत्री ने कहा कि यदि आयोग की अनुशंसाओं के अनुसार राशि उपलब्ध होती है, तो पंचायतों और नगर निकायों के माध्यम से आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और जनकल्याणकारी योजनाओं को नई गति मिलेगी।
राष्ट्रीय कार्यशाला में झारखंड का पक्ष रखा
नई दिल्ली में आयोजित 16वें वित्त आयोग की राष्ट्रीय कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। झारखंड की ओर से ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने राज्य का प्रतिनिधित्व किया।
इस दौरान उन्होंने पंचायतों के लिए प्रस्तावित राशि का स्वागत करते हुए कहा कि आयोग की सिफारिशें स्थानीय निकायों को अधिक सक्षम बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
पंचायतों और नगर निकायों के लिए कितनी राशि प्रस्तावित?
ग्रामीण विकास मंत्री के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक की अवधि के लिए आयोग ने झारखंड की पंचायतों को 11,385 करोड़ रुपये और नगर निकायों को 2,846 करोड़ रुपये देने की अनुशंसा की है।
दोनों को मिलाकर राज्य के स्थानीय निकायों के लिए कुल 14,231 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रस्तावित की गई है।
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ग्रामीण विकास योजनाओं को मिलेगा बल
प्रस्तावित राशि का उपयोग पंचायतों के माध्यम से विभिन्न विकास योजनाओं में किया जा सकेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल, सड़क, स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा स्थानीय निकायों की कार्यक्षमता बढ़ाने और विकास कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने में भी यह राशि महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
15वें वित्त आयोग की योजनाओं का भी मिला लाभ
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि 15वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं से भी झारखंड की पंचायतों को कई विकास योजनाओं के लिए वित्तीय सहयोग मिला था। अब 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें राज्य के ग्रामीण विकास को और अधिक मजबूत बनाने का अवसर प्रदान करेंगी।
उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों को पर्याप्त संसाधन मिलने से विकास योजनाओं का प्रभाव सीधे गांवों तक पहुंचेगा।
समय पर अनुदान जारी करने की उठाई मांग
राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान मंत्री ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पंचायतों और स्थानीय निकायों को मिलने वाली अनुदान राशि समय पर जारी की जानी चाहिए।
उनके अनुसार, कई बार स्वीकृत राशि के वितरण में देरी होने से विकास कार्य प्रभावित होते हैं। यदि समय पर फंड उपलब्ध कराया जाए, तो योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी और तेज़ी से किया जा सकता है।
पंचायतों को मिलेगा वित्तीय और प्रशासनिक संबल
मंत्री ने कहा कि आयोग की अनुशंसाएं केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इससे पंचायतों की प्रशासनिक क्षमता भी मजबूत होगी। स्थानीय स्तर पर संसाधन बढ़ने से जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुसार विकास कार्यों को बेहतर तरीके से लागू कर सकेंगे।
उन्होंने विश्वास जताया कि यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर सुधारने और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में मददगार साबित होगी।
झारखंड के विकास के लिए अहम मानी जा रही सिफारिश
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आयोग की अनुशंसाओं के अनुरूप धनराशि जारी होती है, तो झारखंड के ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों को विकास कार्यों के लिए मजबूत वित्तीय आधार मिलेगा। इससे आधारभूत संरचना के साथ-साथ जनसेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार आने की संभावना है।
फिलहाल 16वें वित्त आयोग की इन सिफारिशों को राज्य के विकास की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।







