झारखंड वित्त विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल
रांची: झारखंड सरकार की हालिया कैबिनेट बैठक में वित्त विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर कई मंत्रियों ने चिंता जताई। मंत्रियों का कहना था कि विभिन्न विभागों की महत्वपूर्ण योजनाओं से जुड़ी फाइलें लंबे समय तक वित्त विभाग में लंबित रहने के कारण विकास कार्यों की गति प्रभावित हो रही है।
सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान नगर विकास एवं उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।
योजनाओं की स्वीकृति में देरी पर जताई चिंता
मंत्रियों ने कहा कि कई योजनाओं की फाइलें महीनों तक वित्त विभाग में लंबित रहती हैं। उनका आरोप था कि कई मामलों में विभाग की ओर से बार-बार अतिरिक्त जानकारियां मांगी जाती हैं, जिससे स्वीकृति प्रक्रिया लंबी हो जाती है और योजनाओं के क्रियान्वयन में अनावश्यक देरी होती है।
उनका मानना है कि समय पर मंजूरी नहीं मिलने से विकास परियोजनाओं की प्रगति प्रभावित हो रही है और संबंधित विभागों को काम पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
नगर विकास विभाग की कई परियोजनाएं अटकी
बैठक में बताया गया कि नगर विकास विभाग की कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं अभी भी स्वीकृति की प्रतीक्षा में हैं।
इनमें आवास, शहरी गलियारे, गोदाम, अर्बन ट्रांसपोर्ट और बुनियादी ढांचे से जुड़ी करीब 74.64 करोड़ रुपये की योजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा लगभग 2,127 करोड़ रुपये की विभिन्न शहरी विकास परियोजनाओं पर भी अंतिम निर्णय लंबित बताया गया।
जमशेदपुर, बोकारो, धनबाद, गिरिडीह और हजारीबाग से संबंधित कई परियोजनाओं की फाइलें भी अभी स्वीकृति का इंतजार कर रही हैं। वहीं 27 नगर निकायों के प्रस्ताव और सात नगर निकायों की करीब 29.38 करोड़ रुपये की योजनाओं पर भी फैसला नहीं हो सका है।
ग्रामीण विकास विभाग की योजनाएं भी प्रभावित
ग्रामीण विकास विभाग ने भी बैठक में अपनी लंबित परियोजनाओं का मुद्दा उठाया।
जानकारी के अनुसार, आवास योजनाओं से जुड़े पुराने भुगतान लंबित हैं और करीब 79.15 करोड़ रुपये का भुगतान अभी तक नहीं हो पाया है। इसके अलावा ग्रामीण सड़क और पुल-पुलिया निर्माण से जुड़ी कई परियोजनाओं की मंजूरी भी लंबित है।
करीब 28 करोड़ रुपये की निर्माण योजनाओं के साथ-साथ लगभग 10 करोड़ रुपये की अतिरिक्त विकास परियोजनाओं पर भी निर्णय नहीं होने से कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
मंत्रियों ने क्या कहा?
कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि कैबिनेट की बैठक से जुड़ी चर्चाएं सार्वजनिक नहीं होनी चाहिए। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को उचित नहीं बताया।
वहीं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने भी इस विषय पर विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि कैबिनेट की बैठक की कार्यवाही गोपनीय होती है और इस पर सार्वजनिक रूप से कुछ कहना उचित नहीं होगा।
रिम्स परियोजना पर वित्त विभाग ने मांगी अतिरिक्त जानकारी
बैठक में रिम्स (राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान) के नए निर्माण कार्य का मुद्दा भी चर्चा में रहा।
सरकार पहले ही इस परियोजना के लिए करीब 4,000 करोड़ रुपये की वित्तीय मंजूरी दे चुकी है। हालांकि वित्त विभाग ने स्वास्थ्य विभाग से यह स्पष्ट करने को कहा है कि इतने बड़े अस्पताल के संचालन के लिए डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य कर्मचारियों की आवश्यकता कैसे पूरी की जाएगी।
इसके साथ ही अस्पताल के संचालन की विस्तृत कार्ययोजना भी मांगी गई है ताकि परियोजना को वित्तीय और प्रशासनिक दृष्टि से व्यवस्थित तरीके से लागू किया जा सके।
वित्त मंत्री ने दिया विभाग का पक्ष
वित्त मंत्री ने विभाग का पक्ष रखते हुए कहा कि योजनाओं को रोकना विभाग का उद्देश्य नहीं है। उन्होंने कहा कि वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए आवश्यक दस्तावेज और सूचनाएं मांगी जाती हैं।
उनके अनुसार, कई मामलों में संबंधित विभागों से पूरी जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं होने के कारण फाइलों के निस्तारण में देरी होती है। विभाग सभी प्रस्तावों को नियमों और वित्तीय प्रक्रियाओं के अनुरूप आगे बढ़ाने का प्रयास करता है।
विकास कार्यों की रफ्तार पर असर
राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में लंबित फाइलों का मुद्दा अब प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। यदि स्वीकृति प्रक्रिया में तेजी आती है तो शहरी विकास, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को गति मिल सकती है।







