हिमंता को चुनौती देने असम पहुंचे हेमंत, आदिवासी वोट पर फोकस
झारखंड की राजनीति से निकलकर अब पूर्वोत्तर की जमीन पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की तैयारी तेज हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने असम में संगठन फैलाने और विधानसभा चुनाव में प्रभावी एंट्री की रणनीति बनानी शुरू कर दी है। पार्टी की नजर करीब 35 से 40 ऐसी सीटों पर है, जहां आदिवासी और चाय बागान से जुड़े मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं।Hemant Soren Expansion
मुख्यमंत्री Hemant Soren के हालिया असम दौरे के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। तिनसुकिया में आयोजित बड़ी सभा को झामुमो की औपचारिक एंट्री का संकेत माना जा रहा है।
किन सीटों पर है खास नजर
पार्टी सूत्रों के मुताबिक झामुमो ने उन इलाकों की पहचान की है जहां आदिवासी आबादी मजबूत है। अनुमान है कि असम में करीब 70 लाख आदिवासी रहते हैं। यही वर्ग चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है।
झामुमो की रणनीति है कि सामाजिक पहचान, अधिकार और कल्याण योजनाओं के मुद्दे को प्रमुखता देकर इस वर्ग के बीच भरोसा बनाया जाए।
तिनसुकिया की सभा से बदला माहौल
1 फरवरी को तिनसुकिया में आयोजित महासभा में हजारों लोगों की मौजूदगी ने राजनीतिक संदेश दे दिया। मंच से हेमंत सोरेन ने आदिवासी समुदाय से संगठित होने की अपील की और कहा कि एकजुट ताकत सत्ता की दिशा बदल सकती है।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिस तरह झारखंड में योजनाओं के जरिए लोगों को सीधा लाभ पहुंचाने की कोशिश हुई, उसी तरह की सोच असम में भी लाई जा सकती है।
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पहले भेजी गई थी रणनीतिक टीम
मुख्यमंत्री के दौरे से पहले झामुमो ने एक प्रतिनिधिमंडल असम भेजा था। इस टीम ने स्थानीय नेताओं, सामाजिक संगठनों और विभिन्न समूहों से बातचीत कर जमीनी हालात समझे। बताया जा रहा है कि इन्हीं बैठकों के बाद बड़े स्तर पर सभा आयोजित करने का फैसला हुआ।
इस कदम को पार्टी के विस्तार अभियान का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
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क्या चुनाव लड़ेगी झामुमो?
पार्टी ने अभी अंतिम रूप से यह घोषित नहीं किया है कि वह असम विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार उतारेगी या नहीं। लेकिन जिस तरह से लगातार बैठकें, दौरे और जनसभाएं हो रही हैं, उससे संकेत मिल रहे हैं कि झामुमो विकल्प खुला रखकर आगे बढ़ रही है।
नेताओं का कहना है कि स्थानीय कार्यकर्ताओं और समुदाय की राय के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।
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भाजपा का क्या कहना है
सत्तारूढ़ दल इस पहल को बहुत गंभीरता से नहीं देख रहा। भाजपा नेताओं का कहना है कि झामुमो का राज्य में संगठन मजबूत नहीं है। हालांकि, झामुमो समर्थकों का दावा है कि आदिवासी समाज के बीच तेजी से समर्थन बढ़ रहा है और आने वाले समय में इसका असर दिखाई देगा।
कांग्रेस भी एक्टिव मोड में
असम की चुनावी हलचल में कांग्रेस भी पीछे नहीं है। पार्टी के वरिष्ठ नेता लगातार दौरे कर रहे हैं और जिला स्तर पर बैठकों का दौर जारी है। विपक्षी राजनीति में नई संभावनाएं बनती दिख रही हैं, जिससे मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।
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बदल सकता है पूर्वोत्तर का समीकरण?
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर आदिवासी और टी-ट्राइब मतदाता एक दिशा में लामबंद होते हैं, तो चुनावी तस्वीर बदल सकती है। झामुमो इसी संभावना पर काम कर रहा है और खुद को एक नए विकल्प के रूप में पेश करना चाहता है।
Disclaimer
यह लेख राजनीतिक गतिविधियों और सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। चुनाव संबंधी फैसले और गठबंधन समय के साथ बदल सकते हैं। यह सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।
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