झारखंड पुलिस में अफसरों की भारी कमी, एक अधिकारी पर कई जिम्मेदारियां
झारखंड पुलिस की प्रशासनिक स्थिति इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। कहीं अफसरों पर जरूरत से ज्यादा काम का दबाव है तो कहीं पद खाली होने के बावजूद जिम्मेदारियां सौंपने में देरी हो रही है। हालात ऐसे हैं कि एडीजी स्तर के अधिकारी को आईजी का Jharkhand Police Crisis अतिरिक्त प्रभार संभालना पड़ रहा है, जबकि 58 डीएसपी पदोन्नति के बावजूद पिछले सात महीनों से इंस्पेक्टर के पद पर ही काम कर रहे हैं। इसके अलावा, प्रशिक्षण पूरा कर चुके 39 नव नियुक्त डीएसपी करीब 15 महीने से पदस्थापन का इंतजार कर रहे हैं।
एक अधिकारी, कई कुर्सियां
झारखंड पुलिस में पदों की कमी और अतिरिक्त प्रभार का चलन अब सामान्य होता जा रहा है।
आईजी से एडीजी में प्रोन्नत मनोज कौशिक को सीआईडी का एडीजी बनाया गया था, लेकिन उन्हें साथ ही आईजी रांची प्रक्षेत्र का अतिरिक्त प्रभार भी सौंप दिया गया। यानी वे एडीजी सीआईडी के साथ-साथ आईजी रांची प्रक्षेत्र की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं।
इसी तरह विशेष शाखा जैसी अहम इकाई में लंबे समय से डीजी या एडीजी स्तर का कोई अधिकारी पदस्थ नहीं है। इस पूरी शाखा की जिम्मेदारी केवल आईजी प्रभात कुमार के कंधों पर है, जो विशेष शाखा के साथ-साथ आईजी जैप का भी कार्य देख रहे हैं।
एसीबी से लेकर जैप तक अतिरिक्त प्रभार
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की एडीजी आईपीएस प्रिया दुबे के पास कई हाई-प्रोफाइल मामलों की निगरानी की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद उन्हें जैप के एडीजी और आधुनिकीकरण सह प्रशिक्षण के एडीजी का भी अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
राजधानी रांची के एसएसपी आईपीएस राकेश रंजन पहले से ही संवेदनशील जिले की कानून-व्यवस्था संभाल रहे हैं। इसके साथ ही उन्हें जैप-1 के कमांडेंट का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।
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जिलों में भी यही हाल
रांची के सिटी एसपी पारस राणा जैप-10 के कमांडेंट का भी अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं। यही स्थिति राज्य के कई जिलों में है, जहां एसपी के साथ-साथ जैप या आईआरबी बटालियन की कमान भी उन्हीं के पास है।
इन जिलों में जामताड़ा, चतरा, लातेहार, गुमला, गोड्डा, गिरिडीह, पलामू और दुमका शामिल हैं।
ये पद अब भी खाली
झारखंड पुलिस में कई शीर्ष और महत्वपूर्ण पद लंबे समय से रिक्त हैं, जिनमें शामिल हैं:
डीजी विशेष शाखा
डीजी प्रशिक्षण
डीजी सीआईडी
एडीजी विशेष शाखा
एडीजी गृह रक्षा वाहिनी
आईजी एसीबी
आईजी रांची
आईजी रेल
डीआईजी रांची
एसपी एसटीएफ
कमांडेंट एसआईएसएफ
कमांडेंट एसआरपी धनबाद
इन पदों के खाली रहने से पूरी व्यवस्था अतिरिक्त प्रभार के सहारे चल रही है।
अतिरिक्त प्रभार से चल रहे अहम पद
आईजी जैप, एडीजी जैप, एडीजी आधुनिकीकरण सह प्रशिक्षण, जैप-1 और जैप-10 के कमांडेंट, आईआरबी की कई बटालियन, एसपी वायरलेस, आईजी रांची और आईजी दुमका जैसे पद फिलहाल अतिरिक्त प्रभार से संचालित हो रहे हैं।
15 महीने से इंतजार में 39 डीएसपी
राज्य में अक्टूबर 2024 में प्रशिक्षण पूरा कर चुके 39 नव नियुक्त डीएसपी अब तक पदस्थापन का इंतजार कर रहे हैं। उनकी पासिंग आउट परेड भी हो चुकी है, लेकिन उन्हें अब तक नियमित पद नहीं मिला है। फिलहाल वे अस्थायी और प्रतिनियुक्ति आधारित ड्यूटी कर रहे हैं।
वहीं 25 जून 2025 को इंस्पेक्टर से डीएसपी पद पर प्रोन्नत 64 अधिकारियों में से कुछ सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन अब भी 58 अधिकारी इंस्पेक्टर के पद पर ही काम कर रहे हैं। प्रोन्नति आदेश में स्पष्ट था कि पदस्थापन की तिथि से ही प्रोन्नति प्रभावी होगी।
सिस्टम पर बढ़ता दबाव
झारखंड पुलिस की यह स्थिति साफ तौर पर बताती है कि प्रशासनिक असंतुलन बढ़ रहा है। जहां कुछ अफसर कई-कई जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, वहीं योग्य अधिकारी पदस्थापन के इंतजार में बैठे हैं। इसका सीधा असर पुलिसिंग, निगरानी और कानून-व्यवस्था पर पड़ना तय माना जा रहा है।
Disclaimer
यह लेख मीडिया रिपोर्ट्स और उपलब्ध प्रशासनिक जानकारी पर आधारित है। समय के साथ पदस्थापन और जिम्मेदारियों में बदलाव संभव है। यह सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।














