Ayodhya Mosque Project Update : बदला नाम, बदली डिजाइन, फिर भी अटका मस्जिद निर्माण

By Akshat Mishra

Published On:

Follow Us
Ayodhya Mosque Project Update : बदला नाम, बदली डिजाइन, फिर भी अटका मस्जिद निर्माण
Spread the love

रामनगरी अयोध्या में प्रस्तावित मस्जिद निर्माण को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर धन्नीपुर गांव में आवंटित पांच एकड़ जमीन पर बनने वाली मस्जिद का निर्माण अभी तक शुरू नहीं हो सका है। कारण वही पुराना है—मस्जिद का नक्शा अब तक विकास प्राधिकरण में दाखिल नहीं हो पाया। ट्रस्ट का दावा है कि नाम बदलने और डिजाइन में बड़े बदलाव के बाद अब मार्च 2026 के अंत तक नक्शा दाखिल कर दिया जाएगा, लेकिन जमीन पर काम शुरू होने की तारीख अभी भी तय नहीं है।


नक्शा अब तक क्यों नहीं हो सका दाखिल

धन्नीपुर में प्रस्तावित मस्जिद निर्माण की प्रक्रिया वर्षों बाद भी कागजों से आगे नहीं बढ़ सकी है। ट्रस्ट की ओर से नक्शा पास कराने के लिए आवेदन की तैयारी पूरी नहीं हो पाई है, जिसके चलते पूरी प्रक्रिया लगातार टलती जा रही है।

ट्रस्ट पदाधिकारियों के अनुसार, तकनीकी कारणों और आंतरिक प्रक्रियाओं में देरी की वजह से नक्शा दाखिल नहीं किया जा सका। अब दावा किया जा रहा है कि सभी औपचारिकताएं पूरी कर मार्च के अंत तक विकास प्राधिकरण के समक्ष नक्शा प्रस्तुत कर दिया जाएगा।


मस्जिद का नाम बदला, प्रोजेक्ट में बड़ा बदलाव

इस बीच मस्जिद ट्रस्ट ने प्रोजेक्ट से जुड़ा एक बड़ा बदलाव भी सामने रखा है। ट्रस्ट के अनुसार अब मस्जिद का नाम बदलकर मोहम्मद साहब के नाम पर रखा जाएगा। इसके साथ ही यह सिर्फ एक धार्मिक ढांचा नहीं बल्कि एक बहुउद्देशीय सामाजिक प्रोजेक्ट होगा।

नई योजना के तहत मस्जिद परिसर में आगे चलकर:

  • कम्युनिटी किचन

  • सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल

  • लाइब्रेरी

  • म्यूजियम

जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। हालांकि फिलहाल ट्रस्ट का कहना है कि पहले केवल मस्जिद के निर्माण पर ही ध्यान दिया जाएगा।


डिजाइन भी बदली, विदेशी पैटर्न को किया गया बाहर

मस्जिद की डिजाइन को लेकर भी बड़ा बदलाव किया गया है। पहले जो नक्शा तैयार किया गया था, वह विदेशी आर्किटेक्चर पैटर्न पर आधारित था। लेकिन मुस्लिम समाज से अपेक्षित सहयोग न मिलने के बाद इस पर पुनर्विचार किया गया।

पिछले वर्ष मुंबई के पास करीब 150 मुस्लिम मौलानाओं, व्यवसायियों और प्रमुख लोगों की एक बैठक हुई थी, जिसमें मस्जिद निर्माण को लेकर कई सुझाव दिए गए। इन्हीं सुझावों के आधार पर अब विदेशी डिजाइन को हटाकर अवध संस्कृति से प्रेरित गुंबदनुमा डिजाइन पर मस्जिद बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।


सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी देरी

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मस्जिद निर्माण के लिए धन्नीपुर में पांच एकड़ भूमि आवंटित की गई थी। लेकिन आवंटन के कई साल बीत जाने के बावजूद निर्माण की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो सकी है।

दूसरी ओर, राम जन्मभूमि परिसर में भव्य राम मंदिर का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और वहां नियमित पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियां चल रही हैं। इसी तुलना के कारण मस्जिद प्रोजेक्ट की धीमी रफ्तार पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।


ट्रस्ट अध्यक्ष का बयान

मस्जिद ट्रस्ट के अध्यक्ष जुफर अहमद फारूकी ने कहा कि नक्शा दाखिल न हो पाने के पीछे किसी तरह की राजनीतिक या कानूनी अड़चन नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह तकनीकी और आंतरिक प्रक्रियाओं से जुड़ा मामला है।

उनके अनुसार,
“सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद मार्च के अंत तक नक्शा विकास प्राधिकरण में दाखिल कर दिया जाएगा। इसके बाद ही मस्जिद निर्माण की दिशा में ठोस कदम बढ़ पाएंगे।”

ये भी पढ़ें:-


अभी भी बना हुआ है असमंजस

हालांकि ट्रस्ट के दावों के बावजूद यह साफ है कि मस्जिद निर्माण को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। नाम बदल गया है, डिजाइन बदल गई है, प्रोजेक्ट का स्वरूप भी बड़ा हो गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम अभी भी शुरू नहीं हो पाया है।

अब सबकी नजर मार्च के अंत पर टिकी है। क्या वाकई नक्शा दाखिल होगा और मस्जिद निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, या यह योजना एक बार फिर कागजों में ही सिमट कर रह जाएगी—यह देखना बाकी है।


Disclaimer

यह लेख मीडिया रिपोर्ट्स और ट्रस्ट पदाधिकारियों के बयानों पर आधारित है। परियोजना से जुड़ी जानकारी समय के साथ बदल सकती है। यह सामग्री केवल सूचना और जनहित के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

Author

Leave a Comment