झारखंड के 14 प्रवासी मजदूर इन दिनों दुबई में बेहद मुश्किल हालात का सामना कर रहे हैं। बेहतर कमाई और परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने के इरादे से विदेश गए ये मजदूर अब न वेतन पा रहे हैं और न ही अपने देश लौट पा रहे हैं। मजदूरों का आरोप है कि उन्हें काम के पूरे पैसे नहीं दिए गए, उनके पासपोर्ट कंपनी ने जब्त कर लिए हैं और उन्हें भारत लौटने से रोका जा रहा है।
2 फरवरी 2026 को इन मजदूरों ने एक वीडियो जारी कर अपनी पीड़ा साझा की और झारखंड सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की। यह वीडियो गिरिडीह के सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली को भेजा गया था, जिसके बाद यह सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और मामला सार्वजनिक हुआ।
Jharkhand Workers Crisis कहां के हैं ये मजदूर
दुबई में फंसे कुल 14 मजदूर झारखंड के तीन जिलों से हैं। इनमें एक मजदूर बोकारो से, चार मजदूर गिरिडीह से और बाकी मजदूर हजारीबाग जिले से ताल्लुक रखते हैं। सभी मजदूर दुबई की एक निजी कंपनी में ट्रांसमिशन लाइन और इलेक्ट्रोमैकेनिकल कार्य में लगे हुए थे।
काम शुरू होने के कुछ समय बाद ही मजदूरों को वेतन को लेकर परेशानी होने लगी। मजदूरों का कहना है कि कई महीनों से उन्हें सही तरीके से पैसा नहीं मिला, जिसके बाद उन्होंने काम बंद कर दिया।
Jharkhand Workers Crisis पासपोर्ट जब्त, लौटने की इजाजत नहीं
गिरिडीह निवासी अजय कुमार महतो ने दुबई से फोन पर बताया कि कंपनी ने सभी मजदूरों के पासपोर्ट अपने पास रख लिए हैं।
उनका कहना है,
“हम यहां पूरी तरह फंस गए हैं। पासपोर्ट कंपनी के पास है और हमें भारत लौटने नहीं दिया जा रहा। हम बस सुरक्षित अपने घर जाना चाहते हैं।”
मजदूरों का आरोप है कि कंपनी कागजों में पूरा वेतन दिखाती है, लेकिन असल में हवाई टिकट और अन्य खर्चों के नाम पर बड़ी रकम काट ली जाती है।
Jharkhand Workers Crisis भारत में परिवार भूखे रहने को मजबूर
इस संकट का असर केवल दुबई तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में मजदूरों के परिवार भी गंभीर परेशानी झेल रहे हैं। बोकारो के दलश्वर महतो ने बताया कि उनके परिवार में पत्नी और तीन बच्चे हैं।
उन्होंने कहा,
“शुरुआत में दो महीने तक मैं घर पैसे भेज पाया, लेकिन अब कुछ भी नहीं भेज पा रहा हूं। मेरे बच्चे और परिवार बहुत मुश्किल में हैं।”
कुछ मजदूरों ने यह भी बताया कि दुबई में उनके पास खाने तक के पैसे नहीं बचे हैं और उन्हें स्थानीय दुकानों से उधार लेना पड़ रहा है।
Jharkhand Workers Crisis एजेंट और मजदूरों के दावे अलग-अलग
मजदूर अक्टूबर 2025 के पहले सप्ताह में हजारीबाग के एक एजेंट के माध्यम से दुबई गए थे। एजेंट का कहना है कि मजदूरों को पहले ही बता दिया गया था कि हर महीने वेतन से कुछ राशि हवाई टिकट खर्च के लिए काटी जाएगी और यह बात कॉन्ट्रैक्ट में भी दर्ज थी।
हालांकि मजदूर इस दावे को पूरी तरह गलत बता रहे हैं। गिरिडीह के राजेश कुमार महतो का कहना है कि इंटरव्यू के समय टिकट या किसी अन्य कटौती की कोई जानकारी नहीं दी गई थी।
उनके अनुसार,
“हमें कहा गया था कि कंपनी फ्लाइट, खाना, रहना और वीजा सब खुद देगी। अब रहने के पैसे भी काटे जा रहे हैं। हमारे पास खाने के लिए भी पैसे नहीं हैं।”
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Jharkhand Workers Crisis सरकार से मदद की गुहार
वीडियो साझा करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली ने झारखंड सरकार से मांग की है कि सभी मजदूरों को जल्द से जल्द सुरक्षित भारत वापस लाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि लौटने के बाद मजदूरों को राज्य में ही रोजगार उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे दोबारा इस तरह की परेशानी में न फंसें।
Jharkhand Workers Crisis श्रम विभाग ने शुरू की जांच
झारखंड श्रम विभाग के प्रवासी नियंत्रण कक्ष ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। विभाग की टीम ने मजदूरों से संपर्क किया है और उनसे कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े दस्तावेज मांगे गए हैं। कुछ दस्तावेज मिल चुके हैं, जबकि बाकी का इंतजार किया जा रहा है। दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
Jharkhand Workers Crisis प्रवासी मजदूरों की सच्चाई
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि विदेश में काम करने वाले भारतीय मजदूर कितने असुरक्षित हालात में रहते हैं। बेहतर भविष्य की उम्मीद में निकले ये लोग कई बार धोखाधड़ी और शोषण का शिकार हो जाते हैं।
अब सभी की नजर सरकार की कार्रवाई पर टिकी है। इन 14 मजदूरों की एक ही मांग है—सम्मान के साथ सुरक्षित घर वापसी।














